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एक दृष्टि में

आसनसोल मंडल

आसनसोल मंडल की स्थापना सन 1925 में हुई थी। यह भारतीय रेलों की प्राचीनतम मंडलों में से एक है और माल तथा यात्री दोनों प्रकार की गाड़ियों में हमेशा यह अग्रणी रहा है। जहाँ तक पूर्व रेलवे का संबंध है, गया होकर ग्रैण्ड कॉर्ड तथा पटना होकर मेन लाइन मार्ग के बीच स्थित रहने के कारण आसनसोल मंडल को परिचालन की हृदयस्थल के रूप में मान्यता मिली हुई है।


मेन लाइन में मंडल का विस्तार पूर्व रेलवे में खाना जंक्शन मे डिस्टैंट सिगनल से लेकर पश्चिम में झाझा स्टेशन के डिस्टेंट सिगनल तक है। वहीं दूसरी ओर ग्रैण्ड कॉर्ड लाइन पर आसनसोल मंडल का प्रशासनात्मक नियंत्रण प्रधानखंटा के डिस्टेंट सिगनल तक है। इस मंडल के क्षेत्राधिकार अंडाल-साइंथिया, अंडाल-तपसी-बाराबनी-सीताराम्पुर, मधुपुर-गिरिडीह, जसीडीह-बैद्यनाथधाम, तथा जसीडीह-दुमका जैसे ब्रांच लाइनों तक विस्तृत है। यह मंडल पश्चिम बंगाल में बर्द्धमान और बीरभुम, बिहार में जमुई तथा झारखंड में धनबाद, जामताड़ा, गिरीडीह, देवघर एवं दुमका जैसे सात जिलों को सम्मिलित करते हुए पश्चिम बंगाल, झारखंड एवं बिहार की घनी आबादी की सेवा करता है।


629.38 किलोमीटर के कुल विस्तार में फैले एस मंडल में खाना से सीतारामपुर तक 4 लाइनों (दो अप तथा दो डाउन) की अद्वितीय विशेषता है। 


रानीगंज, मुगमा, जामताड़ा तथा गिरिडीह क्षेत्र से प्रमुख माल के रूप में कोयला की ढुलाई से इस मंडल को अधिकतम आय प्राप्त होती है। इसके अलावा डी.सी.डब्ल्यू/दुर्गापुर, अल्ट्राटेक्/दुर्गापुर एवं लाफार्ज/रानीगंज से सिमेंट, दुर्गापुर एवं इस्को से इस्पात समग्री तथा आसनसोल, दुर्गापुर, रानीगंज, मधुपुर, जसीडीह से जाने वाले पार्सल जैसे सामानों का परिवहन होता है।

 

 

आसनसोल मंडल स्थित मेजिया(डी.वी.सी.), बक्रेश्वर(डब्ल्यू.बी.पी.डी.सी.एल.), डी.टी.पी.एस.(डी.वी.सी.) एवं डी.पी.एल.(डब्ल्यू.बी.पी.डी.सी.एल.) जैसे प्रमुख पावर हाउसों की आवश्यकताएं पूरी करता है। स्पंज आयरन संयंत्र और छोटे इस्पात संयंत्र के बड़ी संख्या में इस मंडल में स्थित हैं।

 

यात्रियों के लिए सुरूचिकर स्थानों में बैद्यनाथधाम में भगवान शिव का मंदिर है जहाँ श्रावणी मेला के दौरान लाखों की संख्या में तीर्थयात्री उभड़ते हैं। पारसनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार टरमिनस के रूप में गिरिडीह विख्यात है। सिउड़ी स्टेशन से लगभग तीस किलोमीटर की दुरी पर स्थित बक्रेश्वर में गर्म जल के स्रोत/झरने हैं और इसके पानी में बीमारियों को ठिक करने का तथाकथित गुण है। मैथन डैम आसनसोल से 23 किमी की दूरी पर स्थित है। इस बांध अपनी भुमिगत पावर स्टेशन एवं प्राकृतिक पिकनिक स्पॉट के लिए पर्यटकों को आकर्षित करता है। एक प्राचीन कल्याणेश्वरी मंदिर इस बांध मे पास स्थित है।





Source : पूर्व रेलवे CMS Team Last Reviewed on: 04-05-2021  


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